AME Licence category

AME Licence category revised by rev.1 of CAR 66 Issue II dated 10th February 2017.
(a) Aircraft maintenance licences include the following categories:
– Category A
– Category B1
– Category B2
– Category B3
– Category C
(b) Categories A and B1 are subdivided into subcategories relative to combinations of aeroplanes, helicopters, turbine and piston engines. The subcategories are:
– A1 and B1.1 Aeroplanes Turbine
– A2 and B1.2 Aeroplanes Piston
– A3 and B1.3 Helicopters Turbine
– A4 and B1.4 Helicopters Piston
(c) Category B3 is applicable to piston-engine non-pressurised aeroplanes of 2000 kg MTOM and below.

CAR 66 Issue II Rev.1 170210

​CAR Issue II Revision 1 dated 10th February 2017 is proposed to be issued to incorporate amendments made in Rule 61 of the Aircraft Rules, 1937 published vide GSR 911 (E) dated 16-9-2016. 

Salient revision in the CAR as follows:-
       1. CAR 66.A.3 In the existing AME licence category, category B3 is introduced for certifying unpressurised piston engine aircraft below 2000kgs MTOW.
       2. Provision has been made for issue of Category A licence without type rating
       3. 66. A. 20 privileges of AME licence has been replaced with new one in line with rule 61.
       4. 66.A.30 Aircraft Maintenance Experience requirements of issue of Category A, B1.2 and B 1.4 has been revised to 3 years.
       5. Related paragraph in this CAR revised to include new category B3 where ever required.
      6. 66.A.45 endorsement on AME licence for aircraft ratings has been revised suitably to include category B3 requirement.
     7. Appendix –I Basic knowledge requirement has been revised to include syllabus for category B3.
     8. Requirements for certifying staff engaged in certification of aircraft components are detailed in Subpart C (Component).
    9. Application and format are separated from the main CAR and published in the form section on DGCA website.

Kheti ke panch niyam 

खेती में पाँच नियमों का पालन करें :

सरसंघचालक ने कहा कि जैसे हम आदर्श जीवन में यम-नियम का पालन करते हैं, उसी प्रकार आदर्श और उन्नत खेती के लिए पाँच नियमों का पालन प्रारंभ करना होगा। स्वच्छता, स्वाध्याय, तप, सुधर्म और संतोष। स्वच्छता के तहत अपने गाँव को साफ-सुथरा रखना। स्वाध्याय के अंतर्गत कृषि के संबंध में नवीनतम और भारतीय पद्धति का अध्ययन करना। तप की अवधारणा के अनुरूप अपनी जमीन को भगवान मानकर बिना किसी स्वार्थ के उसकी सेवा करते हुए कृषि करना। अपने सुधर्म का पालन करना और संतोष अर्थात् धैर्यपूर्वक जैविक खेती को अपनाना। अच्छे परिणाम के लिए धैर्य और संतोष जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें भेदभाव को पूरी तरह हटाकर मिल-जुल कर रहना होगा, तभी वास्तविक विकास आएगा।

Shri Guruji – sangh 

मई 1938 में नागपुर के संघ-शिक्षा वर्ग के सर्वाधिकारी हो गये। इस तरह से पुन: श्री गुरुजी डा. हेडगेवार के सम्पर्क में आए। सन् 1939 फरवरी के अन्त में डा. हेडगेवार ने सिन्दी (वर्धा जिला विदर्भ प्रदेश)नामक स्थान पर संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें श्री गुरुजी उपस्थित थे। 22 मार्च को संघ कार्य हेतु वे कलकत्ता गये।

इस बीच डा. हेडगेवार का स्वास्थ्य गिरने लगा। श्री गुरुजी ने स्वामी श्री अखण्डानन्द जी की सेवा के समान ही डा. हेडगेवार की भी तन-मन से सेवा की। परन्तु स्वामी जी नहीं बचे किन्तु डाक्टर जी बच गये। पर वह पूर्णरूपेण स्वस्थ नहीं हो पाये। संभवत: इसी कारण से डाक्टर जी ने श्री गुरुजी की रक्षा बन्धान उत्सव के शुभ अवसर पर (दिनांक 13 अगस्त, 1939 के पावन दिवस पर ) ‘सरकार्यवाह के पद पर नियुक्ति’ की। यह गुरु पूजन और श्री गुरुजी का अधिकार ग्रहण साथ ही साथ हुआ। धीरे-धीरे डाक्टर जी ने अपना कार्यभार श्री गुरुजी को सौंपना प्रारम्भ कर दिया। 21 जून 1940 को मात्र 51 वर्ष की आयु में डा. हेडगेवार का देहावसान हो गया।

Sri Guruji – Education

​इण्टरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद गुरुजी ने सन् 1924 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। सन् 1926 में उन्होंने बी.एससी. और सन् 1928 में एम.एससी. की परीक्षायें भी प्राणि-शास्त्र विषय में प्रथम श्रेणी के साथ उत्तीर्ण कीं। इस तरह उनका विद्यार्थी जीवन अत्यन्त यशस्वी रहा। विश्वविद्यालय में बिताये चार वर्षों के कालखण्ड में उन्होंने विषय के अध्ययन के अलावा “संस्कृत महाकाव्यों, पाश्चात्य दर्शन, श्री रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द की ओजपूर्ण एवं प्रेरक ‘विचार सम्पदा’, भिन्न-भिन्न उपासना-पंथों के प्रमुख ग्रंथों तथा शास्त्रीय विषयों के अनेक ग्रंथों का आस्थापूर्वक पठन किया। इसी बीच उनकी रुचि आध्यात्मिक जीवन की ओर जागृत हुई। एम.एससी. की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् वे प्राणि-शास्त्र विषय में ‘मत्स्य जीवन’ पर शोध कार्य हेतु मद्रास (चेन्नई) के मत्स्यालय से जुड़ गये। एक वर्ष के दौरान ही उनके पिता श्री भाऊजी सेवानिवृत्त हो गये, जिसके कारण वह श्री गुरूजी को पैसा भेजने में असमर्थ हो गये। आर्थिक तंगी के कारण श्री गुरूजी को अपना शोध-कार्य अधूरा छोड़ कर में नागपुर वापस लौटना पड़ा।

Shri Guruji -childhood

​राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधव राव  सदाशिव राव गोलवरकर  का जन्म माघ कृष्ण 11 संवत् 1963 तदनुसार 19 फ़रवरी 1906 को महाराष्ट्र के रामटेक में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री सदाशिव राव तथा माता का श्रीमती लक्ष्मीबाई  था। पिताश्री सदाशिव राव प्रारम्भ में डाक-तार विभाग में कार्यरत थे परन्तु बाद में सन् 1908 में उनकी नियुक्ति शिक्षा विभाग में अध्यापक पद पर हो गयी। 

     जब मात्र दो वर्ष के थे तभी से उनकी शिक्षा प्रारम्भ हो गयी थी। पिताश्री भाऊजी जो भी उन्हें पढ़ाते थे उसे वे सहज ही इसे कंठस्थ कर लेते थे।

      सन् 1919 में उन्होंने ‘हाई स्कूल की प्रवेश परीक्षा’ में विशेष योग्यता दिखाकर छात्रवृत्ति प्राप्त की। सन् 1922 में 16 वर्ष की आयु में  मैट्रिक उत्तीर्ण की। 

       सन् 1924 में उन्होंने नागपुरके ‘हिस्लाप कॉलेज’ से विज्ञान विषय में इण्टरमीडिएट की परीक्षा विशेष योग्यता के साथ उत्तीर्ण की। अंग्रेजी विषय में उन्हें प्रथम पारितोषिक मिला। 

       वे भरपूर हाकी तो खेलते ही थे कभी-कभी टेनिस भी खेल लिया करते थे। इसके अतिरिक्त व्यायाम का भी उन्हें शौक था। मलखम्ब के करतब, पकड़ एवं कूद आदि में वे काफी निपुण थे। 

       विद्यार्थी जीवन में ही उन्होंने बाँसुरी एवं सितार वादन में भी अच्छी प्रवीणता हासिल कर ली थी।

Complex motor power aircraft

(1) An aeroplane:
(i) Above 5700 Kg MTOM, or
(ii) Certificated for more than 19 seated passengers, or
(iii) Certificated for operation with at least 2 pilots, or
(iv) Equipped with turbojet engine(s) or more than 1 turboprop engine.
(2) A helicopter:
(i) Above 3175 Kg MTOM, or
(ii) Certificated for more than 9 seated passengers, or
(iii) Certificated for operation with at least 2 pilots, or
(3) A tilt rotor aircraft.